यूनिटेक ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ED की कार्रवाई, लंदन में मौजूद होटल को अस्थाई रूप से किया अटैच

ईडी के एक आला अधिकारी के मुताबिक यूनिटेक ग्रुप के खिलाफ चल रही जांच के दौरान पता चला था कि इस ग्रुप ने घोटाले की सैकड़ों करोड़ रुपये की धनराशि को मनी लॉन्ड्रिंग करते हुए कार्नोस्टी ग्रुप को भेजा था.

यूनिटेक ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ED की कार्रवाई, लंदन में मौजूद होटल को अस्थाई रूप से किया अटैच

नई दिल्ली: यूनिटेक ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत चल रही कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने लंदन में मौजूद बेड एंड ब्रेकफास्ट नाम के एक होटल को अस्थाई रूप से अटैच किया है. होटल का मूल्य लगभग 59 करोड़ रुपये बताया गया है. आरोप है कि घोटाले के पैसे से होटल को खरीदा गया था.

ईडी के एक आला अधिकारी के मुताबिक यूनिटेक ग्रुप के खिलाफ चल रही जांच के दौरान पता चला था कि इस ग्रुप ने घोटाले की सैकड़ों करोड़ रुपये की धनराशि को मनी लॉन्ड्रिंग करते हुए कार्नोस्टी ग्रुप को भेज दिया था. इसमें से 41.3 करोड़ रुपये कार्नोस्टी ग्रुप, भारत और मेसर्स इनडिजाइन एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से पर्याप्त लेयरिंग के बाद यूके को भेजे गए थे.

इन पैसों का उपयोग कार्नोस्टी ग्रुप से संबंधित एक इकाई कार्नोस्टी मैनेजमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर मेसर्स इबौनशोर्न लिमिटेड, यूके के शेयरों को खरीदने के लिए किया गया था. ईडी के मुताबिक बेड एंड ब्रेकफास्ट नाम का होटल  ईबौनशोर्न लिमिटेड के स्वामित्व में हैं और यह कंपनी कार्नोस्टी ग्रुप की यूके स्थित सहयोगी कंपनी है.

कई FIR दर्ज

ईडी के आला अधिकारी के मुताबिक यूनिटेक ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत यह जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई विभिन्न FIR के आधार पर शुरू की गई थी. साथ ही ईडी ने इस मामले में यूनिटेक समूह के जरिए घर खरीददारों द्वारा जमा कराए गए पैसों का घोटाला करते हुए जहां-जहां पैसा भेजा था, ऐसे 38 स्थानों की तलाशी भी ली थी. इस दौरान सैकड़ों करोड़ रुपये की चल अचल संपत्ति का पता चला था. ईडी इस मामले में करोड़ों रुपये की संपत्ति पहले भी अटैच कर चुका है.

ईडी की विदेश में की गई अस्थाई अटैच की कार्रवाई को बड़ी कार्रवाई के तौर पर माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक इस मामले में ईडी जल्दी कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी कर सकता है. ध्यान रहे कि यूनिटेक समूह पर घर खरीददारों के सैकड़ों करोड़ रुपयों के गबन का आरोप है जिनकी अलग-अलग जांच की जा रही है.

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