यमुना में बही, लकड़ी का लट्ठा बना सहारा; 16 घंटे तक तैरती रही

50 वर्षीय एक महिला नाले में बहते-बहते यमुना नदी में पहुंच गई. करीब 16 घंटे के बाद कुछ नाविकों की नजर उन पर पड़ी जिन्होंने बाद में महिला को बाहर निकाला और वापस परिवार से मिलाने में मदद की.

यमुना में बही, लकड़ी का लट्ठा बना सहारा; 16 घंटे तक तैरती रही

जालौन: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के जालौन (Jalaun) में रहने वाली एक 50 वर्षीय महिला शुक्रवार को उफनते हुए एक नाले में गिर गई, और बहते-बहते यमुना नदी में पहुंच गई. इस दौरान अपनी जान बचाने के लिए महिला 16 घंटे तक लकड़ी के लट्ठे से चिपकी रही जो कि तेज धाराओं में उसके रास्ते में आया था. इसके बाद हमीरपुर में करीब 25 किलोमीटर दूर कुछ नाविकों ने उसे बचाया.

नाविकों ने तैरकर बचाया

खबरों के मुताबिक, जय देवी अपने खेतों में गई थीं. इसी दौरान वो गलती से जालौन में उफनते किलंदर नाले में गिर गईं, जो यमुना नदी में मिल जाता है. शुक्रवार की शाम नाले में गिरने के बाद, वह एक तेज धारा के साथ बह कर यमुना नदी में पहुंच गईं. इस दौरान उन्हें एक लकड़ी के लट्ठे का सहारा मिला, जिसकी मदद से वो 16 घंटे तक तैरती रहीं. तभी हमीरपुर जिले के मनकी गांव में नाविकों की नजर बहती हुई बुजुर्ग पर पड़ी. इसके बाद उन्होंने तुरंत इसकी पुलिस को सूचना दी और महिला को बाहर निकाला.

पुलिस ने वापस परिवार से मिलाया

इसके बाद बुजुर्ग महिला को एक अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसके बेटे राहुल और बेटी विनीता को सूचित किया गया. थोड़ी ही देर में वे दोनों अस्पताल में पहुंच गए. इसके बाद में पुलिस ने महिला को उसके परिजनों को सौंप दिया. हरौलीपुर पुलिस चौकी प्रभारी भरत यादव ने कहा, 'डूबते को तिनके का सहारा काफी होता है. यह भगवान के चमत्कार के अलावा और कुछ नहीं था.'

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